ग्रामीण रोजगार में नया बदलाव: बजट 2026-27 में ₹95,600 करोड़ की Viksit Bharat-G RAM G योजना को मंज़ूरी
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को बढ़ावा
बढ़ा हुआ आवंटन इस बात का संकेत है कि सरकार ग्रामीण भारत में रोजगार सृजन को प्राथमिकता देना जारी रखे हुए है। VB-G RAM G को एक परिणाम-उन्मुख (outcome-oriented) और संपत्ति-निर्माण केंद्रित योजना के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसका उद्देश्य अन्य ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।
इस योजना के तहत केंद्र का उद्देश्य ग्रामीण श्रमिकों के लिए निरंतर आजीविका समर्थन प्रदान करते हुए, इसके संचालन ढांचे का पुनर्गठन करना है।
संशोधित केंद्र-राज्य लागत साझेदारी
MGNREGA के तहत जहां केंद्र सरकार वेतन और सामग्री लागत का बड़ा हिस्सा उठाती थी, वहीं VB-G RAM G में 60:40 की लागत-साझेदारी लागू की गई है। इसका अर्थ है कि अब राज्यों को कुल लागत का 40% योगदान देना होगा। हालांकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों को पुरानी 90:10 की सहायता प्रणाली के अंतर्गत ही रखा गया है।
यह परिवर्तन संघीय वित्तीय संतुलन में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है।
राज्यों पर वित्तीय दबाव और रोजगार उत्पादन की चुनौतियाँ
राज्य सरकारों के वित्त विभाग इस नई व्यवस्था के वित्तीय प्रभावों का आकलन कर रहे हैं। प्रारंभिक अनुमान बताते हैं कि बड़े और राजकोषीय रूप से कमजोर राज्यों पर इस नई व्यवस्था से हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त वार्षिक देनदारी आ सकती है। पहले ही कई राज्यों को MGNREGA के तहत प्रतिपूर्ति में देरी का सामना करना पड़ता था।
अब अनिवार्य योगदान बढ़ने के साथ, विशेषज्ञों को आशंका है कि राज्य सरकारें रोजगार सृजन पर प्रशासनिक सीमाएं लगा सकती हैं ताकि बजट पर नियंत्रण रखा जा सके।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- VB-G RAM G, अब MGNREGA की जगह लागू होगी।
- सामान्य राज्यों के लिए केंद्र-राज्य लागत साझेदारी 60:40 होगी।
- पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 की व्यवस्था बनी रहेगी।
- ग्रामीण रोजगार बजट में लगभग ₹10,000 करोड़ की वृद्धि की गई है।
अधिकार आधारित गारंटी से वित्तीय सीमाओं वाली योजना तक
MGNREGA की विशेषता थी कि यह मांग आधारित अधिकार (rights-based guarantee) के रूप में कार्य करती थी, जहाँ काम की उपलब्धता राजकोषीय सीमाओं से स्वतंत्र थी। लेकिन VB-G RAM G एक वित्त-संयोजित मॉडल (fiscal-linked model) पर आधारित है, जिसमें राज्य की वित्तीय क्षमता और बजटीय प्राथमिकताओं पर कार्य सृजन निर्भर करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परिवर्तन प्रभावशीलता और उत्तरदायित्व में सुधार ला सकता है, लेकिन यह योजना की जमीनी पहुंच और सार्वभौमिकता को प्रभावित भी कर सकता है।
यह बदलाव आने वाले वर्षों में ग्रामीण भारत की सामाजिक सुरक्षा संरचना को किस प्रकार प्रभावित करेगा, यह राज्यों की भागीदारी और केंद्र-राज्य समन्वय पर निर्भर करेगा।